ठाकुर का तंज: ₹7,200 करोड़ की परियोजनाएं मंजूर, लेकिन निविदा निकालने की क्षमता नहीं; बविआ ने चुनावी मोर्चाबंदी शुरू की

वसई: वसई-विरार के सर्वांगीण विकास के लिए करोड़ों रुपये की महत्वपूर्ण सड़कें और उड्डाणपुल परियोजनाओं को मंजूरी दिलवाने का श्रेय लेते हुए बहुजन विकास आघाड़ी (बविआ) के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक हितेंद्र ठाकुर ने वर्तमान सत्ताधारियों पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन परियोजनाओं को मंजूरी मिले एक साल से अधिक बीत चुका है, लेकिन भाजपा नेतृत्व वाली सत्ता में निविदाएं निकालने की क्षमता तक नहीं है। ठाकुर रविवार को वसई के चिंचोटी में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में बोल रहे थे। उनके इस बयान से आगामी महापालिका चुनाव से पहले बविआ और भाजपा के बीच राजनीतिक संघर्ष और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

भाजपा सिर्फ कागजी पत्राचार तक सीमित
ठाकुर ने सभा में अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और एमएमआरडीए अधिकारियों के साथ हमारे प्रतिनिधिमंडल की बैठकों के फलस्वरूप महावितरण के उपकेंद्रों के काम शुरू हो चुके हैं। हमने 4 रेलवे उड्डाणपुल, आंतरिक उड्डाणपुल और 7 प्रमुख सड़कों सहित कुल ₹7,200 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दिलवाई थी। लेकिन अब एक साल से ज्यादा समय गुजरने के बावजूद वर्तमान भाजपा सिर्फ कागजी पत्राचार तक सीमित हैं। निविदा निकालने की बुनियादी क्षमता भी उनमें नहीं है।” उन्होंने यह तंज भाजपा पर कसते हुए कार्यकर्ताओं में जोश भरा।

बविआ के लिए अस्तित्व की लड़ाई
आगामी महानगरपालिका, जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों को ध्यान में रखते हुए बविआ ने अपनी रणनीति को मजबूत करना शुरू कर दिया है। पार्टी विभिन्न इलाकों में विभागवार सम्मेलन आयोजित कर रही है। चिंचोटी सम्मेलन वसई-नायगांव पूर्व क्षेत्र के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के लिए था, जिसमें ठाकुर ने चुनावी तैयारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वसई-विरार में करीब 5 साल बाद होने वाले महानगरपालिका चुनाव भाजपा के लिए संगठन विस्तार का अवसर हैं, जबकि बविआ के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है।

एकजुट होकर मैदान में उतरने की अपील
कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए ठाकुर ने विकास कार्यों का लेखा-जोखा पेश किया और पार्टी को एकजुट होकर मैदान में उतरने की अपील की। सम्मेलन में मौजूद कार्यकर्ताओं ने ठाकुर के बयानों पर तालियां बजाकर समर्थन जताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ठाकुर का यह आक्रामक रुख स्थानीय मुद्दों को चुनावी हथियार बनाएगा, जिससे वसई-विरार की सियासत में उबाल आएगा।

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