विरार। मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के लाखों यात्रियों के लिए राहत भरी खबर! लंबे इंतजार के बाद उत्तन-वसई-विरार सी लिंक (Uttan-Vasai-Virar Sea Link – UVSL) प्रोजेक्ट को पर्यावरण विभाग से अंतिम मंजूरी मिल गई है। यह महत्वाकांक्षी समुद्री पुल मुंबई, ठाणे और पालघर जिलों के यात्रियों के लिए ‘संजीवनी’ साबित होने वाला है। अब विरार से सीधे मरीन ड्राइव तक का सफर सिग्नल-मुक्त और निर्बाध हो जाएगा, जिससे वेस्टर्न एक्सप्रेसवे व लोकल ट्रेनों पर दबाव कम होगा।
घंटों जाम, स्थायी समाधान
वसई-विरार से डहाणू तक के लोग रोजाना मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर घंटों जाम झेलते हैं, जबकि लोकल ट्रेनें भीड़भाड़ और जोखिम से भरी हैं। UVSL इस समस्या का स्थायी समाधान बनेगा। मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) द्वारा संचालित यह प्रोजेक्ट घोड़बंदर की कुख्यात ट्रैफिक जाम को हमेशा के लिए खत्म कर देगा।
प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं
– कुल लंबाई: 55.12 किमी
– मुख्य समुद्री पुल: 24.35 किमी (उत्तन से विरार तक समुद्र के ऊपर)
– कनेक्टर्स: 30.77 किमी (मुख्य सड़कों से जोड़ने वाले)
– उत्तन कनेक्टर: 9.32 किमी – वर्सोवा-भायंदर-दहिसर कोस्टल रोड से जुड़ेगा
– वसई कनेक्टर: 2.50 किमी – पूरी तरह ऊंचा (Elevated)
– विरार कनेक्टर: 18.95 किमी – दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (वडोदरा-मुंबई द्रुतगति मार्ग) से सीधा कनेक्शन
नॉन स्टॉप होगी यात्रा
यह सी लिंक दहिसर-भायंदर कोस्टल रोड और वर्सोवा कोस्टल रोड से जुड़कर दक्षिण मुंबई के मरीन ड्राइव से विरार तक नॉन-स्टॉप यात्रा सुनिश्चित करेगा। वर्तमान में वर्सोवा से विरार का सफर 2 घंटे लेता है, जो अब मात्र 45 मिनट में पूरा होगा!
फंडिंग और लागत में कटौती
प्रोजेक्ट की आर्थिक मजबूती इसे और आकर्षक बनाती है:
– JICA (जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी): 72.17% फंडिंग (टोल आधारित वापसी)
– महाराष्ट्र सरकार/MMRDA: 27.83% (पूंजीगत योगदान)
बदली डिजाइन, घटी लागत
शुरुआती अनुमान 87,000 करोड़ रुपये था, लेकिन लेन की संख्या 3+3 करने और खंभों की डिजाइन बदलने से लागत घटकर ₹52,652 करोड़ रह गई।
आर्थिक और क्षेत्रीय लाभ
UVSL वडोदरा-मुंबई द्रुतगति मार्ग और पालघर के महत्वाकांक्षी वाढवण बंदर से सीधे जुड़ेगा। इससे मुंबई के उत्तरी उपनगर दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर से जुड़ेंगे, जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति देगा।
विशेष प्रावधान, SPV गठित
पर्यावरण मंजूरी के बावजूद मैंग्रोव और वन भूमि पर सीमित प्रभाव पड़ेगा, लेकिन MMRDA ने इसके लिए विशेष प्रावधान किए हैं। अब स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) गठित कर कार्य तेजी से शुरू होगा।













